SR-B353 / SR-B374 | परिचय | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09 विज्ञान (हिंदी माध्यम)

  

 SR-B353 | परिचय | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

प्राकृतिक संपदा


परिचय

  • पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जहां जीवन की अपार संभावना है।
  • जीवन के लिए बेहतर परिवेश ताप, जल  तथा भोजन की आवश्यकता होती है।
  • पृथ्वी पर उपस्थित समस्त जीव सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। पृथ्वी पर उपलब्ध संपदा में जल, स्थल तथा वायु को सम्मिलित किया गया है।
  • पृथ्वी का बाहरी मंडल, स्थलमण्डल कहलाता है। 
  • पृथ्वी पर 75% भाग में जल है। इसीलिए पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है।
  • पृथ्वी पर उपस्थित वायु का आवरण वायुमंडल कहलाता है।


 SR-B354 | जीवमंडल| प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

जीवमंडल


जीवमंडल

  • पृथ्वी का वह घेरा, जिसमें वायुमंडल, स्थलमंडल तथा जलमंडल मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं, जीवमंडल कहलाता है।
  • सजीव मिलकर जीवमंडल के जैविक घटकों का निर्माण करते हैं।
  • वायु, जल तथा मृदा जीवमंडल के निर्जीव घटकों का निर्माण करते हैं।



 SR-B355 | वायु | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

वायु


वायु

  • नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जलवाष्प का मिश्रण, वायु कहलाता है।
  • वायुमंडल का मुख्य घटक कार्बन डाइऑक्साइड को माना है। यूकैरियोटिक कोशिकाओं तथा कुछ प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं को ग्लूकोज के अणुओ में तोड़ने तथा ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।




 SR-B356 | जलवायु के नियंत्रण में वायुमंडल की भूमिका | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

जलवायु के नियंत्रण में वायुमंडल की भूमिका


जलवायु के नियंत्रण में वायुमंडल की भूमिका

  • वायुमंडल ऊष्मा का कुचालक होता है।
  • यह दिन के तापमान को अचानक बढ़ने से रोकता है तथा रात के समय ऊष्मा को बाहरी अंतरिक्ष में जाने की दर को कम करता है।




 SR-B357 | वायु की गति अर्थात पवन  | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

वायु की गति अर्थात पवन


वायु की गति अर्थात पवन 

  • वायुमंडल में हवा के अचानक गर्म होने तथा जलवाष्प के बनने के कारण वायु की गतिया होती है।
  • जल के गर्म होने से जलवाष्प का निर्माण होता है।
  • जब स्थल तथा जलीय भाग से होने वाले विकिरण का परावर्तन होता है, तब वायुमंडल में संवहन धारा उत्पन्न होती हैं।
  • स्थलीय तथा जलीय विकिरणों के कारण जब वस्तु गर्म होती है तब यह ऊपर की ओर उठती है।
  • जल की अपेक्षा स्थल भाग जल्दी गर्म हो जाता है जिससे स्थल की वायु तेजी से गर्म होकर ऊपर उठती है और वहां निम्न दाब का केंद्र बन जाता है। तथा समुद्र की वायु कम दाब वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित हो जाती हैं अतः इस प्रकार, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र गति करने से पवनो का निर्माण होता है।
  • दिन के समय हवा समुद्र से स्थल की ओर बहती है।
  • रात्रि काल में स्थल जल की अपेक्षा धीरे-धीरे ठंडा होता है जल के ऊपर की वायु स्थल की वायु से गर्म होती है।
  • विभिन्न वायुमंडलीय प्रक्रियाओं के कारण हवा में गतियां होती हैं।
  • पृथ्वी के घूर्णन तथा पवन के मार्ग में आने वाली पर्वत श्रृंखलाएं भी हवा को विभिन्न रूप से प्रभावित करती हैं।




 SR-B358 | वर्षा  | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

वर्षा


वर्षा

  • दिन के समय में जलीय भाग गर्म हो जाता है तब बहुत बड़ी मात्रा में जल वाष्प बन जाती है और यह जलवाष्प वायु में प्रवाहित हो जाती हैं यहां जलवाष्प वायु में प्रवाहित हो जाती हैं। 
  • इस प्रक्रिया में जलवाष्प की कुछ मात्रा विभिन्न जैविक क्रियाओं के कारण वायुमंडल में चली जाती हैं। यह गर्म वायु  जैसे ही ऊपर उठती है तो यह फैलती है और ठंडी हो जाती है। ठंडा होने के कारण हवा में उपस्थित जलवाष्प छोटी-छोटी बूंदों के रूप में संघनित हो जाती है।
  • बूंदे निर्मित होने के बाद इन बूंदों का भार बढ़ने से वर्षा के रूप में नीचे गिरती है। 
  • कभी-कभी तापमान कम होने की वजह से ओले जाती है।


  SR-B359 | वायु प्रदूषण  | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

वायु प्रदूषण


वायु प्रदूषण

  • वायु में कुछ अवांछित पदार्थों के मिलने के कारण वायु का दूषित होना, वायु  प्रदूषण कहलाता है।
  • जीवाश्म ईंधन (कोयला और पेट्रोलियम) जब सल्फ़र और नाइट्रोजन भी इसके साथ जलते है।
  • सल्फ़र और नाइट्रोजन के जलने से इनके ऑक्साइड मुक्त होते है।
  • सल्फ़र और नाइट्रोजन के ऑक्साइड मानवो की श्वसन क्रिया को बाधित करते है और वर्षा के जल में मिलकर अम्ल वर्षा करते है।


  SR-B360 | हाइड्रोकार्बन  | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

हाइड्रोकार्बन


हाइड्रोकार्बन

  • ईंधनों का दहन होते समय कार्बन के कुछ कण बिना जले वायु में निलम्बित रहते है, हाइड्रोकार्बन कहते है।




  SR-B361 | धूम कोहरा  | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

धूम कोहरा


धूम कोहरा

  • प्रदूषक कणो के साथ जल के कण भी  वायु में मिल जाते है, धूम कोहरा कहते है।
  • यह वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को दर्शाता है।


  SR-B361 | धूम कोहरा  | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

धूम कोहरा


धूम कोहरा

  • प्रदूषक कणो के साथ जल के कण भी  वायु में मिल जाते है, धूम कोहरा कहते है।
  • यह वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को दर्शाता है।



  SR-B363 | जल प्रदूषण | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

जल प्रदूषण


जल प्रदूषण

  • जल में कुछ अवांछित हानिकारक पदार्थों का मिलना, जल प्रदूषण कहलाता है।



  SR-B364 | जल प्रदूषण के कारण | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)


जल प्रदूषण के कारण

जल प्रदूषण के कारण

  • खेतो में छिड़के जाने वाले कीटनाशक और उर्वरक जल में मिलकर प्रदूषण फैलाते है।
  • नालों का प्रदूषित पानी नदी में मिलना
  • उद्योगों का कचरा, रसायन, गर्म पानी का स्वच्छ पानी मे मिलना।
  • आवश्यक पदार्थों का जलाशय से हटना
  • जल में रहने वाले पौधे तथा जंतु के लिये उपयोगी ऑक्सीजन की मात्रा का कम होना, तापमान में परिवर्तन होना।
  • जलाशय का तापमान अचानक बढ़ता है या घटता है तो जलीय जीवो के जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।




  SR-B365 | मृदा में खनिज की प्रचुरता | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

मृदा में खनिज की प्रचुरता


मृदा में खनिज की प्रचुरता

  • मृदा जीवन की विविधता को निर्धारित करती हैं
  • पृथ्वी के बाहर पृष्ठ पर पत्थरों की टूट-फूट अपरदन के कारण मृदा का निर्माण होता है 





  SR-B366 | मृदा का निर्माण करने वाले कारक | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

मृदा का निर्माण करने वाले कारक



मृदा का निर्माण करने वाले कारक

 सूर्य

  • ताप के कारण दिन में पत्थर गर्म होते हैं तथा प्रसारित हो जाते हैं और रात्रि में ठंडा होकर संकुचित हो जाता है। प्रसार और संकुचन की क्रिया के कारण पत्थर टूट जाता है।

 जल

  • मृदा के निर्माण करने के लिए दो विधियों का प्रयोग करता है 
  • A. सूर्य ताप से पत्थरों में दरारे आ जाती है।
  • दरार में जल भरने के कारण पत्थर टूट जाता है।
  • B. तेज गति से चल रही हवा कठोर पत्थरों में भी तोड़फोड़ कर देता है।
  • तेज हवा मिट्टी को  दूर-दूर तक उड़ा ले जाती है।
  • पौधे की जड़ों भी पत्थरों को तोड़ दिया जाता है।
  • पत्थरों के टुकड़ों में टूट कर तथा सड़े गले जीवो के टुकड़े मिलकर मृदा का निर्माण करते हैं।




  SR-B367 | ह्यूमस  | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

ह्यूमस


ह्यूमस 


  • मृदा में सजीवों के टूटे-फूटे टुकड़े मिलकर ह्यूमस का निर्माण करते हैं।
  • ह्यूमस मृदा को रन्ध्रयुक्त बनाता है जिससे मृदा मेंआसानी वायु और जल मिल जाते है।




  SR-B368 | भूमि प्रदूषण  | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

भूमि प्रदूषण


    भूमि प्रदूषण

    • पीड़कनाशो और उर्वरकों का प्रयोग करने से भूमि की उर्वरता कम हो जाती है।
    • उपयोगी पदार्थों का भूमि से हटना, भूमि को बंजर बनाता है।
    • कुछ हानिकारक पदार्थों का मिट्टी में मिलना, भूमि प्रदूषण को दर्शाता है।
    • वायु और जल के कणों से मृदा का स्थानांतरण भी मृदा प्रदूषण को दर्शाता है।
    • पौधों की जड़े मिट्टी को बांधे रखती है जो की अपरदन को रोकने का महत्वपूर्ण कारक है।
    • बड़े स्तर पर पेड़ काटने से से मृदा प्रदूषण तथा जैव विविधता का नुकसान पहुंचाया जाता है।





      SR-B369 | जैव रासायनिक चक्र | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

    जैव रासायनिक चक्र


    जैव रासायनिक चक्र

    • जीवमंडल के जैविक तथा अजैविक घटकों के बीच सामंजस्य के द्वारा ऊर्जा स्थानांतरण को दर्शाता है।
    • जलाशयों से जल का वाष्पीकरण, संघनन, वर्षा होना इत्यादि जल चक्र को दर्शाता है।






      SR-B370 | नाइट्रोजन चक्र | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

    नाइट्रोजन चक्र


    नाइट्रोजन चक्र

    • वायुमंडल में 78% नाइट्रोजन गैस उपस्थित है।
    • प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल, डीएनए, आरएनए और कुछ विटामिन में नाइट्रोजन के अणु पाए जाते हैं।
    • एल्केलाइड तथा यूरिया में भी नाइट्रोजन पाया जाता है।
    • सभी प्रकार के जीवो के लिए नाइट्रोजन गैस आवश्यक होती हैं।
    • स्वतंत्र रूप से पाए जाने वाले बैक्टीरिया नाइट्रोजन स्थितिकरण में सहायता करते हैं। यह बैक्टीरिया फलीदार पौधों की ग्रंथियों तथा जड़ों में पाए जाते हैं। 
    • विभिन्न भौतिक क्रियाओं द्वारा नाइट्रोजन परमाणु नाइट्रेट्स और नाइट्राइट्स में बदल जाते हैं। 
    • बिजली चमकने से वायु से वायु में उत्पन्न ताप तथा दाब नाइट्रोजन की नाइट्रोज ऑक्साइड में बदल देता है। 
    • यह ऑक्साइड जल में मिलकर नाइट्रिक तथा नाइट्राइट अम्ल बनाते हैं तथा वर्षा के साथ भूमि पर गिरते हैं।
    • पौधे नाइट्रेट तथा नाइट्राइट का प्रयोग कर अमीनो अम्ल में बदल देते हैं। इन अमीनो अम्ल से प्रोटीन बनता है।
    • जब जंतु तथा पौधों की मृत्यु हो जाती है तब मिट्टी में मौजूद अन्य बैक्टीरिया विभिन्न योगीको  तथा नाइट्राइट में बदल देता है। कुछ अन्य बैक्टीरिया नाइट्रेट तथा नाइट्रोजन को नाइट्रोजन तत्व मैं बदल देते हैं






      SR-B371 | कार्बन चक्र | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

    कार्बन चक्र


    कार्बन चक्र


    • पृथ्वी पर कार्बन विभिन्न अवस्थाओं में पाया जाता है।
    • इसका मूल रूप हीरा तथा ग्रेफाइट हैं। 
    • वायुमंडल में यह योगिक के रूप में पाए जाती हैं।
    • खनिजों में कार्बोनेट कथा हाइड्रोजन कार्बोनेट के रूप में पाया जाता है।
    • जीवो में कार्बन से निर्मित अणुओं जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन तथा तथा न्यूक्लिक अम्ल के रूप में पाया जाता है।
    • जंतुओं के बाहरी तथा भीतरी कंकाल भी कार्बोनेट के लवणों से बने होते हैं।
    • प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में वायुमंडल या जल में घुले कार्बन डाई ऑक्साइड को ग्लूकोस में बदला जाता है।
    • ग्लूकोस के अणु उर्जा प्रदान करते हैं। 
    • श्वसन की क्रिया द्वारा ग्लूकोज को CO2 में बदला जाता है।
    • खाना पकाने में, गर्म करने में, उद्योगों में से मुक्त कार्बन डाई ऑक्साइड वायुमंडल में मिल जाती है। 




      SR-B372 | ग्रीन हाउस प्रभाव | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

    ग्रीन हाउस प्रभाव


    ग्रीन हाउस प्रभाव

    • ठंडे मौसम में उष्णकटिबंधीय पौधों को गर्म रखने के लिए एक आवरण बनाया जाता है, ग्रीन हाउस कहते हैं।
    • कुछ गैसे जो पृथ्वी पर आने वाले ऊष्मा को पृथ्वी से बाहर जाने से रोकती है, ग्रीन हाउस प्रभाव कहलाता है।
    • कार्बन डाई ऑक्साइड इस प्रभाव को बढ़ाने में अपना योगदान देती है।
    • वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़ने के कारण ऊष्मा का बढ़ना, ग्लोबल वार्मिंग/ऊष्मीकरण कहलाता है।





      SR-B373 | ऑक्सीजन चक्र| प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

    ऑक्सीजन चक्र


    ऑक्सीजन चक्र

    • पृथ्वी पर सर्वाधिक मात्रा में ऑक्सीजन तत्व पाया जाता है। वायुमंडल में 21% ऑक्सीजन पायी जाते हैं।
    • वायु में यह कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में पाई जाती है।
    • पृथ्वी पटल पर सिलिकॉन तथा ऑक्साइड के रूप में पायी जाती है। 
    • कार्बोनेट, सल्फेट, नाइट्रेट में यह खनिजों के रूप में पाई जाती हैं। ऑक्सीजन की मात्रा वायुमंडल में संतुलन बनाए रखती है। वायुमंडल में ऑक्सीजन का उपयोग, श्वसन, दहन तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड के रूप में होती है। 



      SR-B374 | ओजोन परत | प्राकृतिक संपदा | कक्षा- 09  विज्ञान (हिंदी माध्यम)

    ओजोन परत


    ओजोन परत 

    • तत्वीय ऑक्सीजन मूल रूप में द्वीपरमाण्विक अणु के रूप में पाई जाती है।
    • वायुमंडल के ऊपरी भाग में ऑक्सीजन के 3 परमाणु वाले अणु भी पाए जाते हैं, जिसे ओजोन परत कहा जाता है।
    • जिसका सूत्र O3 होता है,  
    • यह हमारे लिए  एक कंबल की तरह कार्य करती है क्योंकि सूर्य से आने हानिकारक विकिरणों का अवशोषण कर लेती है। 
    • विभिन्न यौगिको में क्लोरोफ्लोरोकार्बन (फ़्रीयोन)के कारण ओजोन परत निरंतर रूप से नष्ट हो रही है।




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